
आखिरकार शिवर के गड्ढों में कब तक मौतें होती रहेगी पूछता है nss news पांच दिनों में गड्ढे और खुले सीवर ने दो जिंदगियां निगल लीं… और शासन-प्रशासन अब भी फाइलें पलट रहा है!
रोहिणी की सड़कों पर मौत खुलेआम घूम रही थी, लेकिन DDA, MCD और संबंधित विभाग गहरी नींद में थे।
सवाल है जब सीवर खुले थे तो जिम्मेदार कौन था?
किसकी लापरवाही ने दो घरों के चूल्हे ठंडे कर दिए?
हर हादसे के बाद ढक्कन लगा देना ही क्या प्रशासन का काम है ।क्या जान की कीमत सिर्फ एक खबर बनकर रह गई है?
MCD हो या DDA जिम्मेदारी से भागना अब बंद करो जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ये गड्ढे नहीं, सिस्टम की सोच गहरी रहेगी।
अगर सिस्टम ऐसे ही सोता रहा, तो अगली खबर किसके घर से आएगी ये कोई नहीं जानता
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