



















आज गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर शिक्षा, साहित्य और समाज को एक सूत्र में पिरोने का सराहनीय प्रयास देखने को मिला। ओ.के. मॉडल स्कूल के प्रांगण में आयोजित कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह ने यह साबित कर दिया कि जब मंच सही हो, तो शब्द सिर्फ़ कविता नहीं रहते—वो समाज की आवाज़ बन जाते हैं।
इस आयोजन में साहित्यकारों, कवियों और समाजसेवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से देश, संविधान, नारी शक्ति और सामाजिक चेतना पर गहरी बात रखी। वहीं सम्मान समारोह के ज़रिये उन व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने कार्यों से समाज को नई दिशा दी है।
कार्यक्रम का उद्देश्य साफ़ था
गणतंत्र सिर्फ़ एक तारीख़ नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है।
और साहित्य सिर्फ़ शब्द नहीं, बल्कि बदलाव का हथियार है।
यह आयोजन उन लोगों के लिए एक संदेश है जो कहते हैं कि समाज नहीं बदलता
समाज बदलता है, जब सोच बदलती है… और सोच बदलती है ऐसे ही मंचों से।
जहाँ शिक्षा, साहित्य और सम्मान एक साथ हों वहीं से राष्ट्र निर्माण की असली शुरुआत होती है। 🇮🇳
(अनीता सिंह पत्रकार NSS NEWS)








