
गैस संकट या सिस्टम की नाकामी
आज हालात ऐसे हो गए हैं कि रसोई की आग बुझने लगी है…
रेस्टोरेंट्स पर ताले लगने की नौबत आ गई है…
और आम आदमी गैस सिलेंडर के लिए दर-दर भटक रहा है।
कहीं डिलीवरी नहीं मिल रही…
कहीं गोदाम खाली बताए जा रहे हैं…
तो कहीं लोगों की लंबी-लंबी लाइनें लगी हैं।
सबसे बड़ा सवाल ये है कि
जब सरकार कहती है कि ईंधन की कोई कमी नहीं,
तो फिर जनता क्यों परेशान है?
क्यों होटल और ढाबे बंद होने की कगार पर हैं?
क्यों लोग सिलेंडर के लिए गोदामों के चक्कर काट रहे हैं?
ये सिर्फ गैस की कमी नहीं…
ये सिस्टम की सुस्ती और व्यवस्था की नाकामी की कहानी है।
अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ,
तो सिर्फ रेस्टोरेंट ही नहीं…
आम आदमी की रसोई भी ठंडी पड़ जाएगी।
जब रसोई की आग बुझने लगे…
तो समझ लीजिए व्यवस्था में कहीं न कहीं धुआँ उठ रहा है।
NSS News Anita Singh









