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आज बात एक ऐसे मामले की, जिसने कभी फिल्मी दुनिया और कानूनी गलियारों दोनों में हलचल मचा दी थी।
मामला है मशहूर अभिनेता राजपाल यादव से जुड़ा, जो एक चेक बाउंस केस में सामने आया।
असल में यह पूरा मामला साल 2010 का है। राजपाल यादव ने पहली बार एक फिल्म निर्देशित करने का फैसला किया। फिल्म का नाम रखा गया अता पता लापता इस फिल्म के निर्माण के लिए उन्होंने एक निजी कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया।
फिल्म तो बन गई, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो पाई। आर्थिक नुकसान के चलते कर्ज चुकाने में दिक्कत आई। बताया जाता है कि बाद में जो चेक दिया गया, वह बाउंस हो गया। यहीं से कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।
लंबी सुनवाई के बाद, साल 2018 में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी मानते हुए 6 महीने की जेल की सजा सुनाई। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा, जहां कुछ समय के लिए राहत मिली, लेकिन बाद में सजा पर रोक कायम नहीं रह सकी।
यह मामला सिर्फ एक कलाकार की कानूनी परेशानी नहीं, बल्कि यह भी दिखाता है कि वित्तीय फैसलों में सावधानी कितनी जरूरी है। फिल्म इंडस्ट्री में सफलता और असफलता का फासला बहुत छोटा होता है और गलत आर्थिक प्रबंधन भारी पड़ सकता है।
अच्छे वक्त में भी बुरे वक्त के लिए तैयारी जरूरी है, क्योंकि समय कब करवट बदल ले, कहा नहीं जा सकता
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