24 घंटे के भीतर नोटिस वापस लेना यह दिखाता है

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24 घंटे के भीतर नोटिस वापस लेना यह दिखाता है कि सिस्टम कानून से नहीं, दबाव से चलता है। शंकराचार्य जैसे संवैधानिक-धार्मिक पद से जुड़े मामले में इतनी जल्दबाज़ी प्रशासन की नीयत और निष्पक्षता दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आस्था के नाम पर कार्रवाई और फिर अचानक यू-टर्न—यह न्याय नहीं, बल्कि कमजोरी का खुला प्रदर्शन है।