
अरावली की पहाड़ियाँ
ये सिर्फ पत्थर नहीं हैं ,ये अरावली की साँसें हैं।
लेकिन आज इन्हें काटा जा रहा है, नीलाम किया जा रहा है—
मुनाफ़े की भूख में कुदरत का गला घोंटा जा रहा है।
जिस अरावली ने हमें हवा दी, पानी दिया, जीवन दिया
उसी को मशीनों से रौंदा जा रहा है,
और जिम्मेदार चुप हैं… बेहद शर्मनाक चुप
अगर अरावली टूटी, तो कल हमारी साँसें टूटेंगी।
ये विकास नहीं, ये विनाश है—
और इस अपराध का हिसाब लिया जाएगा।
रिपोर्टर अनीता सिंह








