

Nss news संघर्ष के आगे झुका इंतज़ार? अमित भटनागर का आमरण अनशन स्थगित, अब दो महीने में सर्वे का आश्वासन
प्रभावित परिवारों के हक, पुनर्वास और न्याय की मांग को लेकर जारी चिता आंदोलन में फिलहाल एक अहम मोड़ आया है।
चिता आंदोलन के नेतृत्वकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की पहल और प्रशासन की ओर से मिले आश्वासन के बाद अपना आमरण अनशन स्थगित कर दिया है। लेकिन इस फैसले के साथ ही प्रभावित परिवारों की उम्मीदें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिक गई हैं।
अमित भटनागर का यह संघर्ष सिर्फ एक अनशन तक सीमित नहीं रहा। चिता आंदोलन के जरिए वे उन प्रभावित परिवारों की समस्याओं को सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं, जो अपने अधिकारों, पुनर्वास और सरकारी सूची में नाम दर्ज कराने की मांग कर रहे हैं। जिन लोगों के नाम सर्वे में छूट गए, उनके लिए भी न्याय की आवाज उठाई जा रही है।
आंदोलन के दौरान उठाए गए इन सवालों के बीच नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की पहल के बाद प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि **अगले दो महीने के भीतर प्रभावितों का सर्वे कराया जाएगा और सर्वे से छूटे लोगों के नाम भी सूची में शामिल किए जाएंगे।
इसी आश्वासन के बाद अमित भटनागर ने आमरण अनशन स्थगित करने का फैसला लिया। हालांकि, अनशन स्थगित होने का अर्थ यह नहीं कि प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान हो गया है। असली परीक्षा अब प्रशासन की है—क्या तय समय-सीमा में सर्वे पूरा होगा? क्या छूटे हुए परिवारों को सूची में जगह मिलेगी? और क्या उन्हें उनका वाजिब हक मिल पाएगा?
फिलहाल, संघर्ष से निकली उम्मीद को अब नतीजों में बदलना बाकी है। प्रभावित परिवारों को राहत तभी मिलेगी, जब आश्वासन जमीन पर उतरेंगे।
अमित भटनागर का अनशन भले ही स्थगित हुआ है, लेकिन चिता आंदोलन की मांगें अभी बाकी हैं। अब नजरें प्रशासन के वादे और उसके अमल पर हैं।










